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10 Powerful Bhagavad Gita Shlok in Sanskrit

Bhagavad Geeta Shloka in Sanskrit with meaning in Hindi : 

Bhagavad Gita Shlok in Sanskrit: Bhagavad gita is the essence of vedic knowledge and one of the most important shastra in Vedic literature. It was spoken 5000 years ago by Lord Sri Krishna to the Prince Arjuna on the battlefield of kuruksetra. Bhagavad Gita can be seen as both a historical book and a trans historical book. historically the Bhagavad gita appears as a conversation between two heroes Krishna and Arjuna. Their conversation which runs over 700 Sanskrit verses (shlokas) and 18 chapters in the longest epoch in the world the Mahabharata is about what is the nature of one’s duty at the moment. When a climactic war is about to start Arjuna becomes confused should I fight or should I not fight and at that time he turns to Krishna for guidance. In the Gita because it answers these fundamental questions of life Who am I and what am I meant to do in life what is my identity and what is my destiny. if you are interested to know the answers to these questions about identity and destiny then the Bhagavad Gita is meant for us and in this blog a collection of best and powerful bhagavad gita shlok in Sanskrit with hindi meaning and we hope that will surely help you to transform your day.

Bhagavad Gita Shlok in Sanskrit with Hindi meaning

Sanskrit Transcript:

असक्तबुद्धि: सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृह: |

नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां सन्न्यासेनाधिगच्छति ||

chapter 18 verse 49

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! जो आत्मसंयमी तथा अनासक्त है एवं जो समस्त भौतिक भोगों की परवाह नहीं करता, वह सन्यास के अभ्यास द्वारा कर्मफल से मुक्ति की सर्वोच्च सिद्ध-अवस्था प्राप्त कर सकता है ।

Bhagavad Gita shloka in Sanskrit

Bhagavad Gita shlok in Sanskrit

Sanskrit Transcript:

यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ |
समदु:खसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ||

Bhagavad Gita chapter 2 verse 15

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! जो पुरुष सुख तथा दुःख मैं विचलित नहीं होता और इन दोनों में समभाव रखता है, वह निश्चित रूप से मुक्ति योग्य है ।

Bhagavad Gita shloka in Sanskrit

Sanskrit Transcript:

य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् |
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते ||

Bhagavad Gita chapter 2 verse 19

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! जो इस जीवात्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसे मरा हुआ समझता है, वे दोनों ही अज्ञानी हैं, क्योंकि आत्मा न तो मारता है और न मारा जाता है ।

Bhagavad Gita shloka in Sanskrit

Bhagavad Gita shlok meaning in hindi

Sanskrit Transcript:

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च |
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ||

Bhagavad Gita chapter 2 verse 27

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात् पुनर्जन्म भी निश्चित है । अतः अपने अपरिहार्य कर्तव्यपालन में तुमने शोक नहीं करना चाहिए ।

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Sanskrit Transcript:

सुखदु:खे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ |
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ||

Bhagavad Gita chapter 2 verse 38

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! तुम सुख या दुःख, हानि या लाभ, विजय या पराजय का विचार किये बिना युद्ध करो । ऐसा करने से तुम्हे कोई पाप नहीं लगेगा ।

Bhagavad Gita shloka in Sanskrit

Bhagavad Gita shlok meaning in Hindi

Sanskrit Transcript:

यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन |
ज्ञानाग्नि: सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ||

Bhagavad Gita chapter 4 verse 37

Hindi Translation:

जैसे प्रज्ज्वलित अग्नि ईंधन को भस्म कर देती है, उसी तरह हे अर्जुन ! ज्ञान रूपी अग्नि भौतिक कर्मों के समस्त फलों को जला डालती है ।

 

Sanskrit Transcript:

बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जित: |
अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्ते तात्मैव शत्रुवत् || 

Bhagavad Gita chapter 6 verse 6

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! जिसने मन को जीत लिया है, उसके लिए मन सर्वश्रेष्ठ मित्र है, किन्तु जो ऐसा नहीं कर पाया उसके लिए मन सबसे बड़ा शत्रु बना रहेगा ।

 

Sanskrit Transcript:

सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु |
साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते ||

Bhagavad Gita chapter 6 verse 9

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! जो मनुष्य निष्कपट हितैषियों, प्रिय मित्रों, तटस्थों, मध्यस्थों, इर्ष्यालुओं, शत्रुओं तथा मित्रों, पुण्यात्माओं एवं पापियों को सामान भाव से देखता है, तो वह और भी उन्नत माना जाता है । 

Bhagavad Gita Shlok meaning

 

Sanskrit Transcript:

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि |
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा
न्यन्यानि संयाति नवानि देही || 

Bhagavad Gita chapter 2 verse 22

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने तथा व्यर्थ के शरीरों को त्याग कर नवीन भौतिक शरीर धारण करता है ।

Bhagavad Gita Quotes in Hindi

Bhagavad Gita Shlok meaning

 

Sanskrit Transcript:

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् |
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय: ||

Bhagavad Gita chapter 2 verse 47

Hindi Translation:

हे अर्जुन ! तुम यदि युद्ध में मारे जाओगे तो स्वर्ग प्राप्त करोगे या यदि तुम जीत जाओगे तो पृथ्वी के साम्राज्य का भोग करोगे । अतः दृढ़ संकल्प करके खड़े होओ और युद्ध करो ।

Bhagavad Gita Quotes in Hindi

Gita Shlok in Sanskrit with meaning

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